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ऊष्म व्यंजन किसे कहते हैं? श ष स ह का उच्चारण स्थान

Ushm Vyanjan Kise Kahate Hain (ऊष्म व्यंजन किसे कहते हैं?)

हिंदी व्याकरण में वर्ण भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है। वर्णों के दो मुख्य प्रकार होते हैं – स्वर और व्यंजन। स्वर वे वर्ण होते हैं जिनका उच्चारण बिना किसी रुकावट के किया जाता है, जबकि व्यंजन वे वर्ण होते हैं जिनके उच्चारण में स्वर की सहायता लेनी पड़ती है।

हिंदी भाषा के व्यंजनों को कई भागों में विभाजित किया गया है जैसे – स्पर्श व्यंजन, अंतःस्थ व्यंजन और ऊष्म व्यंजन। इनमें से ऊष्म व्यंजन एक महत्वपूर्ण प्रकार है। इन व्यंजनों का उच्चारण करते समय मुँह से गर्म हवा (ऊष्मा) निकलती है, इसी कारण इन्हें ऊष्म व्यंजन कहा जाता है।

सरल शब्दों में कहा जाए तो जब किसी व्यंजन का उच्चारण करते समय मुख से घर्षण के साथ गर्म हवा निकलती है, तो उस प्रकार के व्यंजन को ऊष्म व्यंजन कहा जाता है।

ऊष्म व्यंजन कितने होते हैं (Ushm Vyanjan Kitne Hain)

हिंदी वर्णमाला में ऊष्म व्यंजन कुल चार होते हैं। ये चारों व्यंजन विशेष प्रकार की ध्वनि उत्पन्न करते हैं, जिसमें हवा के घर्षण के साथ उच्चारण किया जाता है।

इन चारों व्यंजनों को मिलाकर ऊष्म व्यंजन कहा जाता है।


श, ष, स का उच्चारण स्थान

व्याकरण में हर व्यंजन का एक उच्चारण स्थान होता है। उच्चारण स्थान का अर्थ है – वह स्थान जहाँ से किसी वर्ण की ध्वनि उत्पन्न होती है।

1. श का उच्चारण स्थान

का उच्चारण स्थान तालु (Palate) माना जाता है। जब हम “श” बोलते हैं तो जीभ का मध्य भाग तालु के पास आता है और हवा के घर्षण से यह ध्वनि उत्पन्न होती है।

उदाहरण –

  • शक्ति
  • शिक्षा
  • शांति

इन शब्दों में “श” का उच्चारण तालु के पास से होता है।

2. ष का उच्चारण स्थान

का उच्चारण स्थान मूर्धा (Roof of the mouth / palate tip) होता है। इसका उच्चारण करते समय जीभ का अग्र भाग ऊपर की ओर मुड़कर मुँह की छत के मध्य भाग को स्पर्श करता है।

उदाहरण –

  • षट्कोण
  • षड्यंत्र
  • कृष्ण

इन शब्दों में “ष” की ध्वनि मूर्धा से उत्पन्न होती है।

3. स का उच्चारण स्थान

का उच्चारण स्थान दंत (Teeth) माना जाता है। इसका उच्चारण करते समय जीभ दाँतों के पास आती है और हवा के घर्षण से “स” की ध्वनि निकलती है।

उदाहरण –

  • समय
  • सत्य
  • संगीत

इन शब्दों में “स” का उच्चारण दाँतों के पास से होता है।

ह का उच्चारण

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का उच्चारण स्थान कंठ (Throat) होता है। जब हम “ह” बोलते हैं तो ध्वनि गले से निकलती है और हवा के साथ हल्की घर्षण ध्वनि सुनाई देती है।

उदाहरण –

  • हवा
  • हँसी
  • हाथ

इन शब्दों में “ह” का उच्चारण गले से होता है।

ऊष्म व्यंजन कौन-कौन से हैं (Ushm Vyanjan Kaun Kaun Se Hain)

आपका अगला टॉपिक पढ़े व्यंजनों का लेखन-आधारित वर्गीकरण

हिंदी वर्णमाला में निम्नलिखित चार व्यंजन ऊष्म व्यंजन माने जाते हैं –

इन सभी व्यंजनों का उच्चारण करते समय हवा में घर्षण उत्पन्न होता है, जिससे ध्वनि में एक प्रकार की गर्माहट या फुफकार जैसी ध्वनि सुनाई देती है। इसी कारण इन्हें ऊष्म व्यंजन कहा जाता है।

श ष स ह कौन सा व्यंजन है

श, ष, स और ह चारों को हिंदी व्याकरण में ऊष्म व्यंजन कहा जाता है। इनका उच्चारण करते समय मुँह से हवा तेज़ी से निकलती है और उसमें हल्की घर्षण ध्वनि उत्पन्न होती है।

उदाहरण के लिए –

  • – शब्द, शिक्षा, शांति
  • – षट्कोण, षड्यंत्र
  • – समय, संसार, सम्मान
  • – हवा, हँसी, हाथ

इन शब्दों को बोलते समय स्पष्ट महसूस होता है कि मुँह से हवा निकलते हुए ध्वनि बन रही है।

FAQ (Frequently Asked Questions)

जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय मुँह से गर्म हवा (ऊष्मा) घर्षण के साथ निकलती है, उन्हें ऊष्म व्यंजन कहा जाता है। इन व्यंजनों को बोलते समय हवा की हल्की फुफकार जैसी ध्वनि सुनाई देती है।
हिंदी वर्णमाला में ऊष्म व्यंजन कुल चार होते हैं। ये चार व्यंजन हैं –
इन चारों को मिलाकर ऊष्म व्यंजन कहा जाता है।
हिंदी भाषा में निम्नलिखित चार व्यंजन ऊष्म व्यंजन माने जाते हैं –
इनका उच्चारण करते समय मुँह से हवा के साथ घर्षण ध्वनि उत्पन्न होती है।
श, ष, स और ह चारों हिंदी व्याकरण में ऊष्म व्यंजन कहलाते हैं। इनका उच्चारण करते समय हवा का घर्षण होता है, इसलिए इन्हें ऊष्म व्यंजन की श्रेणी में रखा जाता है।
व्याकरण के अनुसार इन व्यंजनों के उच्चारण स्थान अलग-अलग होते हैं –
  • – तालु (Palate)
  • – मूर्धा (Roof of the mouth)
  • – दंत (Teeth)
अर्थात इन व्यंजनों की ध्वनि मुँह के अलग-अलग स्थानों से उत्पन्न होती है।