समास की परिभाषा - samas in hindi

Arpit Nageshwar
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Hindi Vyakaran · Exam Series

समास

परिभाषा, भेद और आसान उदाहरण — एक ही जगह पर

दो शब्दों का मेल जब एक नया, छोटा और अर्थपूर्ण शब्द बनाता है — यही समास है। इस लेख में समास के हर भेद को सरल भाषा, तुलना-सारणी और चित्रों के ज़रिए समझाया गया है, ताकि परीक्षा में यह टॉपिक कभी confuse न करे।

SSC UPSC / राज्य PCS TET / CTET बैंकिंग व रेलवे परीक्षा कक्षा 9–12
शुरुआत यहां से

समास क्या है?

समास का शाब्दिक अर्थ है — संक्षेप या छोटा रूप। जब दो या दो से अधिक शब्द आपस में मिलकर एक नया, छोटा और सार्थक शब्द बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को समास कहा जाता है। मिलने के बाद दोनों शब्दों के बीच लगने वाले परसर्ग (का, के, की, से, में आदि) लुप्त हो जाते हैं, लेकिन अर्थ पूरी तरह बना रहता है।

राजा का पुत्र → राजपुत्र
रसोई के लिए घर → रसोईघर
गंगा का जल → गंगाजल
नील और कमल → नीलकमल

ध्यान दीजिए — हर उदाहरण में लंबा वाक्यांश एक छोटे, ठोस शब्द में बदल गया, पर मतलब वही रहा। यही समास की सबसे बड़ी खूबी है, और यही कारण है कि हर बड़ी प्रतियोगी परीक्षा में इससे प्रश्न ज़रूर आता है — क्योंकि यह टॉपिक शब्दों के आपसी संबंध को समझने की परख करता है, केवल रटने की नहीं।

याद रखने वाली बात: समास में शब्द केवल जुड़ते नहीं, बल्कि उनके बीच एक अर्थ-संबंध बनता है (का, के, की, से, में, और, या...)। यही संबंध पहचान लेने पर समास का भेद बताना बेहद आसान हो जाता है।

बुनियाद समझें

पूर्वपद, उत्तरपद और समास-विग्रह

हर समास में तीन हिस्से काम करते हैं — इन्हें एक बार समझ लेने के बाद हर भेद पहचानना आसान हो जाता है।

राजा पूर्वपद + पुत्र उत्तरपद = राजपुत्र समस्त पद / सामासिक शब्द राजा का पुत्र समास-विग्रह (वापस तोड़कर लिखना) पहला शब्द दूसरा शब्द
चित्र 1 — पूर्वपद + उत्तरपद = समस्त पद, और समस्त पद को वापस खोलना ही समास-विग्रह है
तीन ज़रूरी शब्द
शब्दमतलबउदाहरण
पूर्वपदसमास का पहला शब्दराजपुत्र में राजा
उत्तरपदसमास का दूसरा शब्दराजपुत्र में पुत्र
समस्त पद / सामासिक शब्ददोनों के जुड़ने से बना नया शब्दराजपुत्र
समास-विग्रहसमस्त पद को फिर से अलग करके अर्थ स्पष्ट करनाराजा का पुत्र

परीक्षा में अक्सर या तो समस्त पद देकर विग्रह पूछा जाता है, या विग्रह देकर समस्त पद और उसका भेद पूछा जाता है — इसलिए दोनों दिशाओं में अभ्यास करना ज़रूरी है।

आम गड़बड़ी

संधि और समास में अंतर

शुरुआती स्तर पर छात्र अक्सर संधि और समास को एक जैसा मान लेते हैं, जबकि दोनों की प्रक्रिया अलग है।

फर्क एक नज़र में
बिंदुसंधिसमास
इकाईदो वर्णों का मेलदो शब्दों (पदों) का मेल
क्या बदलता हैउच्चारण के नियमानुसार वर्ण बदलते हैंशब्दों के बीच के परसर्ग (विभक्ति) लुप्त होते हैं
तोड़ने की प्रक्रियाविच्छेदविग्रह
उदाहरणपुस्तक + आलय = पुस्तकालयराजा का पुत्र = राजपुत्र
पूरा नक्शा

समास के 6 भेद — एक नज़र में

हिंदी में समास के छह प्रमुख भेद माने जाते हैं। हर भेद की पहचान इस बात से होती है कि दोनों पदों में से कौन-सा पद प्रधान (मुख्य) है।

पूर्वपद प्रधान अव्ययीभाव उत्तरपद प्रधान तत्पुरुष कर्मधारय द्विगु दोनों पद प्रधान द्वंद्व तीसरा पद प्रधान बहुव्रीहि
चित्र 2 — किस पद की प्रधानता है, यही हर समास की पहचान का आधार है

1. अव्ययीभाव समास

Avyayibhav Samas — पहला पद प्रधान

जिस समास में पहला पद प्रधान हो और पूरा समस्त पद एक अव्यय (जो लिंग, वचन, कारक से कभी नहीं बदलता) की तरह काम करे, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। अक्सर इसका पहला पद उपसर्ग जैसा (यथा, प्रति, आ आदि) होता है।

प्रतिदिन — प्रत्येक दिन
यथाशक्ति — शक्ति के अनुसार
आजन्म — जन्म से लेकर
घर-घर — हर घर
यथासंभव — जितना संभव हो
पहचान का शॉर्टकट: अगर शब्द की शुरुआत यथा/प्रति/आ/भर जैसे अव्यय से हो और पूरा शब्द क्रिया-विशेषण जैसा काम करे — तो समझ लीजिए, अव्ययीभाव समास है।

2. तत्पुरुष समास

Tatpurush Samas — दूसरा पद प्रधान

तत्पुरुष सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला समास है, क्योंकि इसमें कारक (विभक्ति) की पूरी समझ जांची जाती है। इसमें उत्तरपद (दूसरा शब्द) प्रधान होता है और दोनों पदों के बीच का कारक-चिह्न (का, को, से, के लिए, में, पर आदि) विग्रह करने पर दिखाई देता है।

तत्पुरुष कर्म चिह्न: को करण चिह्न: से/द्वारा सम्प्रदान चिह्न: के लिए अपादान चिह्न: से (अलग) सम्बन्ध चिह्न: का/के/की अधिकरण चिह्न: में/पर रथचालक मनचाहा रसोईघर पथभ्रष्ट राजपुत्र जलमग्न 6 उप-भेद कारक-चिह्न के अनुसार तय होते हैं
चित्र 3 — तत्पुरुष समास के 6 उप-भेद और उनकी पहचान का कारक-चिह्न
तत्पुरुष के उप-भेद और उदाहरण
उप-भेदकारक-चिह्नउदाहरणविग्रह
कर्म तत्पुरुषकोरथचालकरथ को चलाने वाला
करण तत्पुरुषसे / के द्वारामनचाहामन से चाहा
सम्प्रदान तत्पुरुषके लिएरसोईघररसोई के लिए घर
अपादान तत्पुरुषसे (अलगाव)पथभ्रष्टपथ से भ्रष्ट
सम्बन्ध तत्पुरुषका / के / कीराजपुत्रराजा का पुत्र
अधिकरण तत्पुरुषमें / परजलमग्नजल में मग्न

तत्पुरुष के दो खास उपभेद (अक्सर पूछे जाते हैं)

नञ् तत्पुरुष — पहला पद निषेधात्मक हो: असंभव = न संभव, अनादि = न आदि
कर्मधारय (समानाधिकरण तत्पुरुष) — दोनों पद एक ही कारक में हों, विशेषण-विशेष्य का रिश्ता बनाएं

3. कर्मधारय समास

Karmadharay Samas — विशेषण-विशेष्य का मेल

जब समास के दोनों पद विशेषण-विशेष्य या उपमेय-उपमान के रिश्ते में हों, यानी एक पद दूसरे पद की विशेषता बताए — तो वह कर्मधारय समास कहलाता है। यह वास्तव में तत्पुरुष का ही एक विशेष रूप है, जिसमें उत्तरपद प्रधान होता है।

नीलकमल — नीला है जो कमल
चंद्रमुख — चंद्र जैसा मुख
महात्मा — महान है जो आत्मा
पीताम्बर — पीत है जो अंबर
पहचान का शॉर्टकट: विग्रह में "है जो" या "के समान / जैसा" आए, और शब्द किसी संख्या का बोध न कराए — तो कर्मधारय समझिए।

4. द्विगु समास

Dvigu Samas — संख्यावाचक पूर्वपद

जिस समास का पहला पद संख्यावाचक (एक, दो, तीन, पंच, नव आदि) हो और पूरा शब्द किसी समूह या समाहार का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं। ध्यान रहे — यहाँ संख्या से किसी विशेष वस्तु का अर्थ नहीं, बल्कि पूरे समूह का अर्थ निकलता है।

नवग्रह — नौ ग्रहों का समूह
त्रिलोक — तीन लोकों का समाहार
पंचतंत्र — पांच तंत्रों का समूह
दोपहर — दो पहरों का समाहार
पहचान का शॉर्टकट: पहला शब्द अगर संख्या हो (एक/द्वि/त्रि/चतुर/पंच/नव/शत...) — तो द्विगु समास होने की पूरी संभावना है, बस यह जांच लें कि यह किसी समूह की बात कर रहा है या किसी वस्तु के गुण की — अगर गुण की बात है तो वह बहुव्रीहि हो सकता है।

5. द्वंद्व समास

Dvandva Samas — दोनों पद प्रधान (बराबरी का दर्जा)

इस समास में कोई भी पद गौण नहीं होता — दोनों पद बराबर महत्व रखते हैं। विग्रह करने पर और, या, अथवा, एवं जैसे शब्द जुड़ते हैं। इसे आसान भाषा में समास का "and का कॉन्सेप्ट" भी कहा जा सकता है।

माता-पिता — माता और पिता
रात-दिन — रात और दिन
देश-विदेश — देश और विदेश
भला-बुरा — भला या बुरा
पहचान का शॉर्टकट: दोनों शब्दों को विग्रह में "और / या" से जोड़ने पर वाक्य सही बने, और दोनों पद बराबर के महत्वपूर्ण लगें — तो द्वंद्व समास है।

6. बहुव्रीहि समास

Bahuvrihi Samas — तीसरा (बाहरी) अर्थ प्रधान

यह सबसे दिलचस्प और सबसे ज़्यादा confuse करने वाला भेद है। इसमें दोनों में से कोई पद प्रधान नहीं होता — बल्कि दोनों मिलकर किसी तीसरी वस्तु या व्यक्ति की ओर इशारा करते हैं। विग्रह में "जिसका, जिसकी, जिसके, वाला है वह" जैसे शब्द आते हैं।

नीलकंठ — नीला है कंठ जिसका (शिव)
चतुर्भुज — चार भुजाओं वाला (विष्णु)
दशानन — दस हैं आनन जिसके (रावण)
वीणापाणि — वीणा है जिसके हाथ में (सरस्वती)
पहचान का शॉर्टकट: अगर शब्द का असली अर्थ शब्द में मौजूद दोनों पदों से नहीं, बल्कि किसी तीसरे (बाहरी) व्यक्ति या वस्तु से जुड़ता है — तो बहुव्रीहि समास है।
एग्जाम हैक

समास पहचानने की सबसे तेज़ ट्रिक

परीक्षा में 3–4 सेकंड में सही भेद पहचानने के लिए नीचे दिया गया क्रम अपनाइए — हर सवाल में यही चार सवाल खुद से पूछिए।

पहला पद संख्या है? (एक/द्वि/त्रि/पंच...) नहीं ↓ हाँ द्विगु समास दोनों पद बराबर प्रधान? विग्रह में "और/या" आता है हाँ द्वंद्व समास नहीं ↓ अर्थ किसी तीसरे व्यक्ति/ वस्तु की ओर जाता है? हाँ बहुव्रीहि समास नहीं ↓ पहला पद अव्यय है और क्रिया-विशेषण जैसा है? हाँ अव्ययीभाव समास नहीं ↓ एक पद दूसरे की विशेषता बताता है? हाँ कर्मधारय समास नहीं ↓ (बचा हुआ) तत्पुरुष समास (कारक-चिह्न से उप-भेद तय करें)
चित्र 4 — प्रश्न-दर-प्रश्न आगे बढ़कर सही भेद तक पहुंचें (ऊपर से नीचे क्रम में जांचें)
प्रैक्टिस टिप: रटने की बजाय हर हफ्ते 8–10 नए समस्त पदों को इसी फ्लोचार्ट से खुद हल कीजिए — 2 हफ्तों में यह टॉपिक पूरी तरह पक्का हो जाएगा।
कन्फ्यूज़न दूर करें

जो भेद अक्सर गड्ड-मड्ड हो जाते हैं

कर्मधारय बनाम बहुव्रीहि

दोनों में शब्द एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन अर्थ की दिशा अलग होती है।

उदाहरण: नीलकंठ
समासविग्रहप्रधान अर्थ कहाँ है
कर्मधारय (सामान्य विशेषण के रूप में)नीला कंठअर्थ शब्दों में ही है (कंठ नीला है)
बहुव्रीहि (शिव के लिए)नीला है कंठ जिसकाअर्थ बाहर तीसरे व्यक्ति (शिव) पर जाता है

द्विगु बनाम बहुव्रीहि

उदाहरण: चतुर्भुज
समासविग्रहअर्थ
द्विगुचार भुजाओं का समूहएक ज्यामितीय आकृति (समूह-वाचक)
बहुव्रीहिचार हैं भुजाएं जिसकीविष्णु (तीसरे व्यक्ति की विशेषता)

द्विगु बनाम कर्मधारय

द्विगु का पहला पद हमेशा संख्यावाचक होता है; कर्मधारय का पहला पद विशेषण तो होता है, पर संख्यावाचक कभी नहीं।

नवरात्र — नौ रात्रियों का समूह (द्विगु)
रक्तोत्पल — रक्त-सा (लाल) है जो उत्पल (कर्मधारय)
हाथ आज़माइए

अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण उदाहरण

नीचे दी गई सारणी में शब्द और विग्रह देखकर पहले खुद भेद पहचानने की कोशिश कीजिए, फिर उत्तर से मिलान कीजिए।

Practice Set
शब्दविग्रहभेद
त्रिलोचनतीन हैं लोचन (आँखें) जिसकी — शिवबहुव्रीहि
देशभक्तिदेश के लिए भक्तितत्पुरुष (सम्प्रदान)
पंचवटीपांच वटों का समाहारद्विगु
नर-नारीनर और नारीद्वंद्व
सुशीलअच्छे शील वालाकर्मधारय
यथाशीघ्रजितना शीघ्र हो सकेअव्ययीभाव
जलधरजल को धारण करने वाला — बादलबहुव्रीहि
गंगाजलगंगा का जलतत्पुरुष (सम्बन्ध)
अक्सर पूछे गए सवाल

FAQ

समास और संधि में मुख्य अंतर क्या है?

संधि दो वर्णों के मेल से बनती है और उच्चारण के नियमों पर आधारित होती है, जबकि समास दो शब्दों (पदों) के मेल से बनता है और शब्दों के बीच के परसर्ग हटाकर एक नया संक्षिप्त शब्द बनाता है।

कर्मधारय और तत्पुरुष में क्या रिश्ता है?

कर्मधारय दरअसल तत्पुरुष समास का ही एक विशेष रूप है, जिसे "समानाधिकरण तत्पुरुष" भी कहा जाता है — इसमें दोनों पद एक ही कारक (कर्ता) में होते हैं और विशेषण-विशेष्य का संबंध बनाते हैं।

बहुव्रीहि समास पहचानने में सबसे बड़ी मुश्किल क्या आती है?

बहुव्रीहि के शब्द अक्सर कर्मधारय या तत्पुरुष जैसे दिखते हैं। सबसे भरोसेमंद तरीका यह है — विग्रह करने पर देखिए कि अर्थ शब्द के अंदर ही पूरा हो रहा है या किसी बाहरी तीसरे व्यक्ति/वस्तु की ओर इशारा कर रहा है।

क्या हर समास में उत्तरपद ही प्रधान होता है?

नहीं। अव्ययीभाव में पूर्वपद प्रधान होता है, द्वंद्व में दोनों पद बराबर प्रधान होते हैं, और बहुव्रीहि में कोई भी पद प्रधान नहीं होता — अर्थ किसी तीसरे शब्द पर जाकर टिकता है। केवल तत्पुरुष, कर्मधारय और द्विगु में उत्तरपद प्रधान होता है।

⚡ क्विक रिवीज़न शीट

  • समास = दो शब्दों का मेल → एक छोटा, अर्थपूर्ण नया शब्द
  • अव्ययीभाव → पहला पद प्रधान, पूरा शब्द अव्यय जैसा (यथाशक्ति)
  • तत्पुरुष → दूसरा पद प्रधान, कारक-चिह्न से 6 उप-भेद (राजपुत्र)
  • कर्मधारय → विशेषण-विशेष्य का रिश्ता, "है जो / जैसा" (नीलकमल)
  • द्विगु → पहला पद संख्यावाचक, समूह का बोध (नवग्रह)
  • द्वंद्व → दोनों पद बराबर प्रधान, "और/या" से विग्रह (माता-पिता)
  • बहुव्रीहि → अर्थ किसी तीसरे (बाहरी) व्यक्ति/वस्तु की ओर (नीलकंठ = शिव)
  • सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले भेद: तत्पुरुष, बहुव्रीहि, द्वंद्व
Arpit Nageshwar

✍️ Arpit Nageshwar

Post-graduated | Web Developer | +3 yr Experience