Shringar Ras ke Udaharan
नीचे दिए गए सभी श्रृंगार रस उदाहरण प्रसिद्ध कवियों और साहित्यिक ग्रंथों से लिए गए हैं। ये उदाहरण सरकारी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाते हैं। हर श्रृंगार रस उदाहरण के साथ उसकी सरल और स्पष्ट व्याख्या दी गई है।
shringar ras easy example in hindi - श्रृंगार रस के सबसे आसान उदाहरण
“कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात। भरे भौन में करत हैं, नैनन ही सों बात।।” — बिहारी
➤ इस दोहे में नायक-नायिका के मिलन का चंचल, प्रेमपूर्ण और लज्जा से भरा भाव दिखाई देता है। यह संयोग श्रृंगार का अत्यंत सरल और प्रसिद्ध उदाहरण है।
उदाहरण 1 (बिहारी)
नहिं पराग, नहिं मधुर मधु, नहिं विकास इह काल।
अली कली ही सों बंध्यो, आगे कौन हवाल।।
- व्याख्या: यहाँ नायिका की तुलना कली से की गई है, जो अभी पूरी तरह नहीं खिली। यह संयोग श्रृंगार का सुंदर उदाहरण है जहाँ प्रेम की शुरुआत दिखाई गई है।
उदाहरण 2 (बिहारी)
सतसैया के दोहरे ज्यों नावक के तीर।
देखन में छोटे लगें, घाव करें गंभीर।।
- व्याख्या: यह दोहा प्रेम के प्रभाव को दर्शाता है। प्रेम के शब्द छोटे लगते हैं, लेकिन दिल पर गहरा असर डालते हैं।
उदाहरण 3 (सूरदास)
मैया! मोहि दाऊ बहुत खिझायो।
मोसे कहत मोल को लीयो, तू जसुमति कब जायो।।
- व्याख्या: इसमें बाल कृष्ण की लीलाओं के माध्यम से वात्सल्य के साथ हल्का श्रृंगार भाव भी झलकता है।
उदाहरण 4 (जयदेव - गीत गोविंद)
स्मरगरल खण्डनं मम शिरसि मण्डनं।
देहि पदपल्लवमुदारम्।।
- व्याख्या: इसमें राधा-कृष्ण के प्रेम का अत्यंत मधुर चित्रण है। यह संयोग श्रृंगार का श्रेष्ठ उदाहरण है।
उदाहरण 5 (तुलसीदास)
कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि।
कहत लखन सन राम हृदय गुनि।।
- व्याख्या: सीता जी के आभूषणों की ध्वनि सुनकर राम का मन आकर्षित होता है। यह संयोग श्रृंगार को दर्शाता है।
उदाहरण 6 (विद्यापति)
कनक-कमल पद पंकज सुंदर।
नयन सरोज, वदन अरविंद।।
- व्याख्या: इसमें नायिका के सौंदर्य का वर्णन किया गया है। यह श्रृंगार रस का मुख्य लक्षण है।
उदाहरण 7 (घनानंद)
आवत ही हरि हाय! पिया मिलन की आस।
नयनन में बसि गए, छूटत नाहीं पास।।
- व्याख्या: इसमें प्रिय के प्रति गहरी लगन और प्रेम दर्शाया गया है। यह संयोग श्रृंगार का उदाहरण है।
उदाहरण 8 (मीरा बाई)
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।
जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई।।
- व्याख्या: इसमें भक्ति के साथ श्रृंगार का भाव भी है, जहाँ मीरा कृष्ण को अपना प्रिय मानती हैं।
उदाहरण 9 (कालिदास)
कस्तूरी तिलकं ललाटपटले वक्षःस्थले कौस्तुभम्।
नासाग्रे वरमौक्तिकं करतले वेणुं करे कंकणम्।।
- व्याख्या: इसमें श्रीकृष्ण के सौंदर्य का विस्तृत वर्णन है, जो संयोग श्रृंगार को दर्शाता है।
उदाहरण 10 (बिहारी)
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सोह करे, भौंहनु हँसे, देन कहे नट जाय।।
- व्याख्या: इसमें राधा-कृष्ण के प्रेमपूर्ण हास्य और चंचलता को दिखाया गया है। यह संयोग श्रृंगार का प्रमुख उदाहरण है।
श्रृंगार रस के 20 उदाहरण
सबसे आसान श्रृंगार रस का उदाहरण (अलग)
“मैया! मोहि दाऊ बहुत खिझायो।” — सूरदास
➤ इसमें बाल-कृष्ण का स्नेह और प्रेमपूर्ण भाव व्यक्त हुआ है, जो श्रृंगार रस का सरल रूप है।
संयोग श्रृंगार के 10 उदाहरण
1. “कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात।
भरे भौन में करत हैं, नैनन ही सों बात।।”
— बिहारी
➤ इसमें नायक-नायिका के मिलन के समय की चंचल और प्रेमपूर्ण भाव-भंगिमाएँ दिखाई गई हैं।
2. “अधर सुधा रस बरसत, देखि स्याम की छवि।” — सूरदास
➤ श्रीकृष्ण के सुंदर रूप को देखकर प्रेम और आकर्षण का भाव प्रकट हो रहा है।
3. “श्याम तुहिन सम अंग, अरुन अधर अरु नैन।” — केशवदास
➤ इसमें प्रिय के रूप-सौंदर्य का मनोहर वर्णन है।
4. “नवल किशोर सुन्दर दोउ, खेलत कुंज बिहारी।” — सूरदास
➤ राधा-कृष्ण के साथ खेलते हुए मिलन का आनंद दर्शाया गया है।
5. “सोहत स्याम सनेह सों, राधा तन मन लाय।” — बिहारी
➤ राधा का तन-मन कृष्ण के प्रेम में लीन होना संयोग श्रृंगार को दर्शाता है।
6. “राधा-कृष्ण एक देह दोउ, प्रेम प्रगाढ़ अपार।” — घनानंद
➤ इसमें राधा-कृष्ण के गहरे और अटूट प्रेम का वर्णन है।
7. “देखि सखी! स्याम सों मिलन, पुलकित भयो शरीर।” — पद्माकर
➤ प्रिय से मिलन पर हर्ष और रोमांच का भाव प्रकट हो रहा है।
8. “चरण कमल रज चाहत, नंदलाल मुसकाय।” — सूरदास
➤ प्रेमपूर्ण मिलन में स्नेह और आकर्षण का भाव दिखाया गया है।
9. “नयनन बीच बसे स्याम, मन मधुप रस पाय।” — बिहारी
➤ प्रिय के दर्शन से मन में आनंद और प्रेम उत्पन्न हो रहा है।
10. “लाज भरी अँखियन सों, पिया सों कही न जाय।” — घनानंद
➤ मिलन के समय लज्जा और प्रेम का सुंदर चित्रण है।
वियोग श्रृंगार के 10 उदाहरण
11. “सखि, वे मुझसे कहकर जाते।” — जयशंकर प्रसाद
➤ इसमें प्रिय के बिना बताए चले जाने का दुःख व्यक्त किया गया है।
12. “अवधि बीती जात, न आए श्याम।” — सूरदास
➤ प्रिय के इंतजार में बीतते समय की पीड़ा दिखाई गई है।
13. “निसदिन बरसत नैन हमारे।” — सूरदास
➤ वियोग में आँखों से निरंतर आँसू बहने का वर्णन है।
14. “पिया बिनु नाहीं आवत चैन।” — विद्यापति
➤ प्रिय के बिना मन को शांति नहीं मिलती, यह वियोग का भाव है।
15. “श्याम बिना राधा अति उदास।” — घनानंद
➤ प्रिय के अभाव में राधा की उदासी व्यक्त की गई है।
16. “उड़ि गए पंछी संग पिया, रहि गई मैं अकेली।” — मीरा
➤ प्रिय के दूर चले जाने से अकेलेपन और विरह का भाव प्रकट होता है।
17. “बिनु देखे नंदलाल, सूना लागे गाँव।” — सूरदास
➤ प्रिय के बिना सब कुछ सूना लगने का भाव वियोग को दर्शाता है।
18. “प्रियतम बिन जीवन सूना।” — बिहारी
➤ प्रिय के अभाव में जीवन की निरर्थकता दिखाई गई है।
19. “नयनन बहत निरंतर नीर।” — घनानंद
➤ वियोग में निरंतर आँसू बहने का चित्रण है।
20. “सखि! हिय दग्ध भयो बिरह अगिनि।” — केशवदास
➤ विरह की अग्नि से हृदय जलने का मार्मिक भाव व्यक्त हुआ है।
संयोग श्रृंगार रस के 20 उदाहरण
1. “कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात।
भरे भौन में करत हैं, नैनन ही सों बात।।”
— बिहारी
➤ मिलन के समय प्रेम, चंचलता और लज्जा का सुंदर चित्रण।
2. “नवल किशोर सुन्दर दोउ, खेलत कुंज बिहारी।” — सूरदास
➤ राधा-कृष्ण के मिलन और क्रीड़ा का आनंद।
3. “सोहत स्याम सनेह सों, राधा तन मन लाय।” — बिहारी
➤ राधा का तन-मन कृष्ण के प्रेम में लीन।
4. “देखि सखी! स्याम सों मिलन, पुलकित भयो शरीर।” — पद्माकर
➤ प्रिय से मिलकर रोमांच और हर्ष की अनुभूति।
5. “श्याम तुहिन सम अंग, अरुन अधर अरु नैन।” — केशवदास
➤ प्रिय के रूप-सौंदर्य का मनोहर वर्णन।
6. “राधा-कृष्ण एक देह दोउ, प्रेम प्रगाढ़ अपार।” — घनानंद
➤ मिलन में अद्वैत और गहरा प्रेम।
7. “चरण कमल रज चाहत, नंदलाल मुसकाय।” — सूरदास
➤ प्रेम और आकर्षण का भाव।
8. “नयनन बीच बसे स्याम, मन मधुप रस पाय।” — बिहारी
➤ प्रिय के दर्शन से आनंद की अनुभूति।
9. “लाज भरी अँखियन सों, पिया सों कही न जाय।” — घनानंद
➤ मिलन में लज्जा और प्रेम का संगम।
10. “कुंज-बिहारी संग राधा, रस बरसत अति धार।” — परंपरागत कृष्ण काव्य
➤ प्रेममय मिलन का भाव।
11. “मंद-मंद मुसकात स्याम, चित चोरि ले गयो।” — ब्रज काव्य परंपरा
➤ मुस्कान से हृदय मोहित होना।
12. “राधा संग स्याम बिहरत, बन-उपवन सुख पाय।” — सूर परंपरा
➤ साथ रहने का आनंद।
13. “आनन पर अरुनिमा छाई, देखत स्याम सुभाय।” — रीति काव्य
➤ मिलन में मुख की लाली और सौंदर्य।
14. “सखि! आजु मिलन की रात।” — ब्रज पदावली
➤ प्रिय मिलन की उत्सुकता।
15. “करत परस्पर हँसि विनोद।” — कृष्ण भक्त कवि
➤ मिलन में हास-परिहास।
16. “प्रिय आलिंगन भरि, भूली जग सारी।” — भक्त काव्य
➤ आलिंगन में संसार का विस्मरण।
17. “नयनों की भाषा कह गई बात।” — रीति काव्य
➤ नेत्रों से प्रेम का आदान-प्रदान।
18. “राधा मुख चंद्र समान, स्याम रहे निहार।” — ब्रज काव्य
➤ सौंदर्य के आकर्षण का चित्रण।
19. “संग सखी सब हास करत, मन हरष अपार।” — कृष्ण लीला पद
➤ मिलन में सामूहिक आनंद।
20. “मिलि दोउ भए एक मन, प्रेम सुधा रस धार।” — रीति परंपरा
➤ मिलन में एकत्व और प्रेम की पराकाष्ठा।
शृंगार रस उदाहरण (मराठी)
१. सोपे उदाहरण
“राधे तुझा साज पाहुनी, मोहित झाला श्याम।” ➤ येथे प्रियकराला प्रेयसीच्या सौंदर्यामुळे प्रेम व आकर्षण वाटते, त्यामुळे शृंगार रस प्रकट होतो.
२. संयोग शृंगार रसाची उदाहरणे
1. “तुज पाहता जीव माझा हरपला।” ➤ प्रिय व्यक्तीला पाहून मन हरपण्याचा भाव.
2. “हातात हात घेता उमलली प्रीती।” ➤ मिलनातून प्रेम अधिक दृढ होत असल्याचे चित्रण.
3. “चांदण्यांच्या साक्षीने भेट घडली।” ➤ सुंदर वातावरणातील प्रेममिलन.
4. “लाजरी नजर तुझी बोलकी झाली।” ➤ नजरेतून व्यक्त होणारा प्रेमभाव.
5. “फुलांसवे हसली ती, पाहुनी प्रियकराला।” ➤ मिलनातील आनंद आणि कोमलता.
३. वियोग शृंगार रसाची उदाहरणे
6. “तुजविण जगणे आता व्यर्थ वाटते।” ➤ प्रिय व्यक्तीच्या अभावातील वेदना.
7. “डोळ्यांत साचले अश्रू तुझ्या आठवणीने।” ➤ विरहामुळे डोळ्यांत आलेले अश्रू.
8. “रात्रभर जागी मी तुझी वाट पाहत।” ➤ प्रियकराच्या प्रतीक्षेतील व्याकुळता.
9. “मन झाले उदास तुझ्याविना।” ➤ वियोगातील खिन्नता.
10. “आठवणींच्या सावलीत हरवले मन।” ➤ आठवणींमधून प्रकट होणारा विरहभाव.